यूपी क्लासिकल स्वाईन फीवर टीकाकरण 2026: सूकर पालकों के लिए नई गाइडलाइनयूपी क्लासिकल स्वाईन फीवर टीकाकरण 2026: सूकर पालकों के लिए नई गाइडलाइन
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सूकर पालकों के लिए बड़ी चेतावनी और खुशखबरी! 15 अप्रैल से शुरू होने जा रहा है यह महा-अभियान, सरकार ने जारी किए सख्त निर्देश

PashupalanNEWS.in 23 मार्च 2026

महा-अभियान का आगाज: 15 अप्रैल से आपके द्वार पहुंचेगी स्वास्थ्य टीम

उत्तर प्रदेश के सूकर पालकों के लिए इस समय की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। यदि आप भी सूकर पालन के व्यवसाय से जुड़े हैं, तो यह जानकारी आपके लिए संजीवनी साबित हो सकती है। पशुपालन विभाग ने एल.एच.डी.सी. योजना के तहत क्लासिकल स्वाईन फीवर (CSF) के खिलाफ जंग छेड़ दी है। निदेशक, रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र के निर्देशानुसार, आगामी 15 अप्रैल 2026 से 15 मई 2026 तक पूरे प्रदेश में एक विशेष टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। यह अभियान सिर्फ एक सरकारी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि आपके पशुओं को जानलेवा बीमारी से बचाने का एक सुरक्षा कवच है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि बी.पी. संस्थान लखनऊ से वैक्सीन की खेप मंगवाई जा रही है और इसे हर हाल में निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाना है। इस बार प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए ‘डोर-टू-डोर’ यानी पशुपालक के द्वार पर जाकर टीकाकरण करने की योजना बनाई है।

टैगिंग और डिजिटल पंजीकरण: अब एक टैग से सुरक्षित होगा पूरा बाड़ा

इस बार टीकाकरण की प्रक्रिया में तकनीक का बड़ा सहारा लिया जा रहा है। भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, केवल टीका लगाना ही काफी नहीं होगा, बल्कि पशु का पंजीकरण और टैगिंग भी अनिवार्य कर दी गई है। नई गाइडलाइन के मुताबिक, हर बाड़े में कम से कम एक नर सूकर को टैग लगाना अनिवार्य होगा। इसी टैग के आधार पर पूरे बाड़े के पशुओं का रिकॉर्ड डिजिटल किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया की फोटो खींचकर ‘भारत पशुधन एप’ पर अपलोड की जाएगी। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में सरकारी लाभ लेने के लिए भी यह डेटाबेस अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। पशुपालकों को सलाह दी जाती है कि वे टैगिंग प्रक्रिया में टीम का सहयोग करें क्योंकि बिना टैगिंग के टीकाकरण का रिकॉर्ड मान्य नहीं होगा।

टीकाकरण से पहले डिवर्मिंग जरूरी: पशुओं के स्वास्थ्य का डबल सुरक्षा चक्र

अक्सर देखा गया है कि पशुओं के पेट में कीड़े होने की वजह से वैक्सीन का असर कम हो जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने ‘एस्केड’ योजना के अंतर्गत एक मास्टर प्लान तैयार किया है। नई गाइडलाइन के अनुसार, टीकाकरण से पहले सभी सूकर प्रजाति के पशुओं को पारजीवीनाशक दवाओं (डिवर्मिंग) का सेवन कराया जाएगा। यह दवाएं पशुपालन विभाग द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। विभागीय टीम को निर्देश दिए गए हैं कि वे टीकाकरण से पूर्व डिवर्मिंग का कार्य सुनिश्चित करें और इसका पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। इस कदम से पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी और क्लासिकल स्वाईन फीवर जैसी घातक बीमारी के खिलाफ वैक्सीन 100 प्रतिशत प्रभावी तरीके से काम कर सकेगी। यह पशुपालकों की आय को सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा वैज्ञानिक कदम है।

पैरावेट्स को मानदेय और व्यापक प्रचार-प्रसार: कैसे सफल होगा अभियान?

इस अभियान को सफल बनाने के लिए सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ पैरावेट्स की भी फौज उतारी जा रही है। जमीनी स्तर पर काम करने वाले पैरावेट्स को प्रति टीकाकरण 5.00 रुपये का मानदेय दिया जाएगा, जो योजना के अंतर्गत देय होगा। इसके अलावा, इस अभियान को केवल विभाग तक सीमित न रखकर जन-जन तक पहुँचाने की योजना है। ग्राम प्रधानों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और स्वयंसेवी संगठनों (NGOs) को इस अभियान से जोड़ा जा रहा है ताकि कोई भी पशुपालक छूट न जाए। साथ ही, टीकाकरण के दौरान ‘दस्तक संचारी रोग अभियान’ की जानकारी भी दी जाएगी ताकि ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैले। पशुपालकों से अनुरोध है कि वे अपनी टीम के साथ सहयोग करें और किसी भी जानकारी के लिए अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क करें। खेती-किसानी और पशुपालन से जुड़ी हर छोटी-बड़ी खबर के लिए हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें: https://chat.whatsapp.com/EbG7Ed1YmdkJVf5HJJuzVM?mode=gi_t

? अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्रश्न 1: क्लासिकल स्वाईन फीवर (CSF) टीकाकरण कब से शुरू होगा?

उत्तर: यह टीकाकरण अभियान 15 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 15 मई 2026 तक चलेगा।

प्रश्न 2: क्या सूकर टीकाकरण के लिए कोई शुल्क देना होगा?

उत्तर: नहीं, यह टीकाकरण अभियान सरकारी योजना के तहत पूरी तरह से निःशुल्क है।

प्रश्न 3: भारत पशुधन एप पर फोटो क्यों अपलोड की जा रही है?

उत्तर: टीकाकरण की पारदर्शिता और डिजिटल रिकॉर्ड रखने के लिए भारत पशुधन एप पर फोटो अपलोड करना अनिवार्य है।

प्रश्न 4: क्या सभी सूअरों को टैग लगाना जरूरी है?

उत्तर: गाइडलाइन के अनुसार, प्रति बाड़ा कम से कम एक नर सूकर को टैग लगाना अनिवार्य है, जिसके आधार पर पूरे बाड़े का टीकाकरण दर्ज होगा।

प्रश्न 5: डिवर्मिंग (पेट के कीड़े की दवा) क्यों जरूरी है?

उत्तर: टीकाकरण से पहले डिवर्मिंग करने से पशु की प्रतिरोधक क्षमता सुधरती है और वैक्सीन का असर बेहतर होता है।

प्रश्न 6: पैरावेट्स को इस अभियान में कितना मानदेय मिलेगा?

उत्तर: इस योजना के तहत पैरावेट्स को प्रति पशु टीकाकरण के लिए 5.00 रुपये का मानदेय दिया जाएगा।

प्रश्न 7: क्या घर बैठे टीकाकरण की सुविधा मिलेगी?

उत्तर: हाँ, विभाग की टीमें पशुपालकों के घर/बाड़े पर जाकर ही टीकाकरण का कार्य करेंगी।

प्रश्न 8: वैक्सीन की कोल्ड चेन का क्या मतलब है?

उत्तर: वैक्सीन की प्रभावशीलता बनाए रखने के लिए उसे एक निश्चित ठंडे तापमान पर रखना अनिवार्य है, जिसे कोल्ड चेन कहते हैं।

प्रश्न 9: क्या उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में यह अभियान चलेगा?

उत्तर: हाँ, यह आदेश पशुपालन विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा राज्य के सभी जनपदों के लिए जारी किया गया है।

प्रश्न 10: टीकाकरण के बाद अगर पशु बीमार हो जाए तो क्या करें?

उत्तर: टीकाकरण के बाद मामूली बुखार आ सकता है, लेकिन किसी भी असामान्य स्थिति में तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करें।

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